Skip to main content

गोरखपुर में मासूमों की मौत पर सांसत में योगी आदित्यनाथ सरकार !

Thanks for reading

गोरखपुर: ऑक्सीजन की कमी से 60 बच्चों की मौत के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार (13 अगस्त) को बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज का दौरा किया और बच्चों की मौत पर अपनी बात कहते हुए भावुक भी हो गए। सीएम ने कहा, कि ‘मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पूरे मामले की जांच कमेटी गठित की गई है। रिपोर्ट तक इंतजार करें। दोषियों पर इस तरह की कार्रवाई होगी, कि वो गलत काम करने वालों के लिए मानक होगी। कार्रवाई के बाद कोई भी गलत काम करने के बारे में दस बार सोंचेगा।’
निरीक्षण के लिए BRD हॉस्पिटल पहुंचे CM योगी, मासूमों को देख हुए भावुक
सीएम योगी के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी थे। सीएम ने कहा, कि इस इलाके के जनप्रतिनिधि होते हुए वे जापानी बुखार या दिमागी बुखार की लड़ाई 1996 से लड़ रहे हैं। सड़क से संसद तक उन्होंने अपनी जंग जारी रखी है। उनसे ज्यादा इस मामले को और कौन जानता है।
ना दें ‘नरसंहार’ की संज्ञा    
नड्डा ने पत्रकारों से भी कहा, कि वो एक-दो की संख्या में वार्डों में जाएं और देखें कि अस्पताल में इलाज हो रहा नरसंहार नहीं। कुछ लोगों ने तो बच्चों की मौत को नरसंहार की संज्ञा दे दी है। बाहर से फेक रिपोर्टिंग करने से अच्छा है कि अंदर जाकर देखें।’
देखिए CM साहब: लीगल नोटिस के बावजूद हॉस्पिटल ने नहीं किया था पेमेंट
रिसर्च सेंटर का दिया आश्वासन
सीएम ने कहा, कि ‘गोरखपुर में जब तक वायरल रिसर्च सेंटर नहीं होगा, तब तक इस लड़ाई को पूरी तरह नहीं जीता जा सकता।’ हालांकि केंद्रीय मंत्री ने जल्द ही रिसर्च सेंटर खोलने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, कि ‘सिर्फ बाबा राघव दास ही नहीं बल्कि राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में यदि किसी की लापरवाही से जन हानि होती है तो दोषी बचेंगे नहीं।’
तो क्या इस IAS अफसर की लापरवाही से जुदा हुईं मासूमों की सांसे
पीएम नरेंद्र मोदी नजर बनाए हुए हैं
योगी आदित्यनाथ बोले, कि ‘पीएम नरेंद्र मोदी लगातार गोरखपुर की घटना की जानकारी ले रहे हैं। हर तरह की मदद का आश्वासन भी दिया है। केंद्र से डॉक्टरों की टीम भी यहां काम कर रही है।’ केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, कि ‘सीएम से उनकी बात हुई है। केंद्र सरकार चिकित्सा और स्वास्थ्य के मामले यूपी को हरसंभव मदद करने को तैयार है।’

Comments

Popular posts from this blog

History of Bhati Vansh【भाटी वंश का इतिहास】

भाटी  अथवा "भट्टी" • भारत और पाकिस्तान के राजपूत कबीले है . •भाटी राजपूत (जिसे बरगला भी कहा जाता है) चंद्रवंशी मूल के होने का दावा करता है। •भाटी कबीले द्वारा कभी-कभी अपने पुराने नाम "यादवपती" , जो कृष्ण और यदु या यादव से उनके वंश को दर्शाते थे,का भी प्रयोग किया जाता है। •12 वीं सदी में भाटी राजपूत ने जैसलमेर पर शासन किया। ये लोग ऊंट सवार, योद्धाओं और मवेशी चोरी और शिकार के शौकीन थे। रेगिस्तान में गहरे स्थित होने के कारण, जैसलमेर भारत में मुस्लिम विस्तार के दौरान सीधे मुस्लिम आक्रमण से बच गया था लेकिन अंततः मुसलमानों ने उन्हें हराया था। • कुछ भाटी खानाबदोश मवेशी रखने वाले थे। 1857 के विद्रोह से पहले के कुछ वर्षों में, इन समूहों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा किए गए फैसलों के कारण अपनी जमीन खो दी थी, जो कि जाट किसानों को चराई वाले भूमि को पूर्व में दिल्ली और हरियाणा क्षेत्रों में भाटियों द्वारा आवृत करती थी। • राजस्थान के भाटी राजपूत में से कुछ ,उन समुदायों में शामिल थे जो 1883-1998 के बीच कन्या शिशु ह्त्या करते थे। दीपालपुर में हिंदू भाती राजपूत स...

रावणा राजपुत का इतिहास

Ravna Rajput【रावणा राजपुत】 इतिहास :- प्राचीनतम आर्य संस्कृति के क्षत्रिय वर्ण का मुख्य दायित्व सुरक्षा एवं शासन करना था। सुरक्षा की दृष्टि से शत्रुओं से युद्ध करके राज्य के अस्तित्व को बनाये रखना और प्रजा की रक्षा करना  तथा शासन की दृष्टि से प्रजा की सेवा करना क्षत्रियों का परम कर्तव्य था।  ये ही क्षत्रिय वर्ण के लोग अनगिनत जातियों में विभक्त हो गए। राजपूत जाति उनमें से एक है। आर्य संस्कृति के चारों वर्ण जब भिन्न भिन्न जातियों में विभाजित होने लगे, तब हिन्दू संस्कृति का  प्रादुर्भाव हुआ।  आज जाति व्यवस्था हिन्दू धर्म के प्रमुख लक्षणों में से एक महत्वपूर्ण लक्षण है। जिसमे ऊँच-नीच छूत अछूत जैसी बुराईयाँ व्याप्त है।  कालांतर में राजपूत जाती में भी अनेक जातियां  निकली। उस व्यवस्था में रावणा राजपूत नाम की जाति राजपूत जाति में से निकलने वाली अंतिम जाती है, जिसकी पहचान के पूर्वनाम दरोगा, हजुरी वज़ीर     आदि पदसूचक नाम है। राजपूत जाति से अलग पहचाने जाने वाली इस जाति प्रारंभिक काल मुग़ल शासन है।  भारत में अंग्रेजी शासन के उस काल में जबकि अनेक सम...

चीन से निपटने के लिए भारत उठाएगा अब यह है कदम

नई दिल्ली, प्रेट्र :  रक्षा मंत्रालय ने करीब 4000 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा पर बुनियादी ढांचा को मजबूत करने का फैसला लिया है। सेना के कमांडरों के कांफ्रेंस में डोकलाम में दो महीने से ज्यादा समय तक चले विवाद को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि कांफ्रेंस में डोकलाम में चीन के साथ चली तनातनी के अलावा उत्तरी सीमा पर सभी संभावित सुरक्षा चुनौतियों पर भी विचार किया गया। स्टाफ ड्यूटी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विजय सिंह ने सम्मेलन के परिणामों की जानकारी दी। इसमें रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा अन्य ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि उत्तरी सेक्टर में सड़क निर्माण गतिविधि की दिशा में गहराई से विचार करने का फैसला लिया गया। सिंह ने कहा कि कमांडरों ने मौजूदा क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ सांगठनिक बदलाव पर विचार किया। सोमवार से एक सप्ताह तक चले कांफ्रेंस को थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने संबोधित किया। उन्होंने कमांडरों से हर समय हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने को कहा। रक्षा मंत्री ने की सेना की सराहना रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांफ्रेंस...