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चीन से निपटने के लिए भारत उठाएगा अब यह है कदम

नई दिल्ली, प्रेट्र : रक्षा मंत्रालय ने करीब 4000 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा पर बुनियादी ढांचा को मजबूत करने का फैसला लिया है। सेना के कमांडरों के कांफ्रेंस में डोकलाम में दो महीने से ज्यादा समय तक चले विवाद को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि कांफ्रेंस में डोकलाम में चीन के साथ चली तनातनी के अलावा उत्तरी सीमा पर सभी संभावित सुरक्षा चुनौतियों पर भी विचार किया गया।
स्टाफ ड्यूटी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विजय सिंह ने सम्मेलन के परिणामों की जानकारी दी। इसमें रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा अन्य ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि उत्तरी सेक्टर में सड़क निर्माण गतिविधि की दिशा में गहराई से विचार करने का फैसला लिया गया।
सिंह ने कहा कि कमांडरों ने मौजूदा क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ सांगठनिक बदलाव पर विचार किया। सोमवार से एक सप्ताह तक चले कांफ्रेंस को थल सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने संबोधित किया। उन्होंने कमांडरों से हर समय हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने को कहा।
रक्षा मंत्री ने की सेना की सराहना
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांफ्रेंस में कमांडरों को संबोधित करते हुए सेना की सराहना की। उन्होंने कहा कि बाहरी और आंतरिक खतरों का सेना ने त्वरित और प्रभावी रूप से सामना किया और उसका समाधान निकाला। रक्षा मंत्री ने शत्रु शक्तियों के खिलाफ सतर्क रहने पर जोर दिया और उभरती चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए सभी सेवाओं की एकजुटता पर बल दिया।

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